विधानसभा भर्ती प्रकरण को लेकर जहां उत्तराखंड की राजनीति में घमासान मचा है, वहीं इंटरनेट मीडिया में भी यह लगातार चर्चा के केंद्र में है। इस कड़ी में नित कार्मिकों की सूची वायरल हो रही हैं।
मंगलवार को एक ऐसी सूची वायरल हुई, जिसमें अंतरिम विधानसभा से लेकर अब तक विधानसभा में नियुक्ति पाए कर्मियों के माननीयों के करीबी व रिश्तेदार होने का उल्लेख किया गया है।
चौथी विधानसभा के कार्यकाल में हुई 72 नियुक्तियों का प्रकरण उछलने के बाद से इंटरनेट मीडिया में रोजाना विधानसभा में नियुक्ति पाए कर्मियों और उनके माननीयों से संबंध में सूची वायरल की जा रही हैं। हाल में तीसरी व चौथी विधानसभा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों का ब्योरा देती सूची के साथ ही तब नियुक्ति के लिए आए प्रार्थनापत्र वायरल हुए थे।
मंगलवार को भी एक ऐसी ही सूची तेजी से वायरल हुई। इसमें बताया गया है कि वर्ष 2000 से अब तक विधानसभा में नियुक्ति पाए तमाम कर्मियों के किस माननीय से क्या संबंध है। इनमें अधिकांश उनके करीबी बताए गए हैं, जबकि कुछ नाते-रिश्तेदार।
यद्यपि, कई माननीयों ने इस कथित सूची को लेकर इंटरनेट मीडिया में कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही इसमें शामिल नामों से उनका कोई संबंध न होने की बात भी कही है।
राज्य गठन के बाद हर विधानसभा के कार्यकाल में हुई हैं नियुक्तियां
उत्तराखंड राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद अब विधानसभा में हुई भर्तियों के प्रकरण ने इन दिनों तूल पकड़ा है। राज्य में अब तक सत्तासीन होते आए दोनों ही राजनीतिक दल भाजपा व कांग्रेस अपने-अपने हिसाब से इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वास्तविकता यह है कि उत्तराखंड गठन के बाद से प्रत्येक विधानसभा के कार्यकाल में विधानसभा में नियुक्तियां होती आई हैं। वर्तमान में विधानसभा में सभी संवर्गों के कार्मिकों की संख्या 425 पहुंच गई है। चौथी विधानसभा में हुई नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस ने हमलावर रुख अख्तियार किया, तो भाजपा भी आक्रामक मुद्रा में है।
विधानसभा में नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी का विषय तब चर्चा में आया, जब हाल में इंटरनेट मीडिया पर चौथी विधानसभा के कार्यकाल की 72 नियुक्तियों की सूची वायरल हुई।
कहा गया कि चहेतों को पिछले दरवाजे से ये नियुक्तियां दी गईं। कांग्रेस ने तुरंत यह मुद्दा लपकते हुए प्रदेश सरकार को घेरने में देर नहीं लगाई। यह बात भी उठी कि नियुक्ति के लिए नियमावली को दरकिनार कर दिया गया।
यही नहीं, विधानसभा ने जिन पदों के लिए पूर्व में परीक्षा कराई थी, उसका परिणाम अभी तक नहीं निकला। बावजूद इसके भर्तियां कर दी गईं। यद्यपि, तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान में धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भर्तियां तदर्थ हैं और ये नियमानुसार हुई हैं।
विधानसभा अध्यक्ष को आवश्यकतानुसार नियुक्तियां करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन पदों के लिए परीक्षा हुई थी, उसका प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
इस बीच कांग्रेस के इस हमले के जवाब में भाजपा खेमे से तीसरी विधानसभा के कार्यकाल में हुई 158 नियुक्तियों का मामला उछाला गया। कहा गया कि तब कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों, चहेतों को बड़ी संख्या में नियुक्तियां दी गईं। साफ है कि इस प्रकरण का राजनीतिकरण हो चुका है और दोनों ही दल अपने-अपने हिसाब से तर्क देकर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों ने ही एक-दूसरे के विरुद्ध तलवारें खींची हुई हैं।
यह है व्यवस्था:
जानकारों के अनुसार संविधान में व्यवस्था दी गई है कि विधानसभा में होने वाली नियुक्तियों के लिए विधानसभा अध्यक्ष नियुक्ति प्राधिकारी होंगे।
जब तक विधानसभा में नियुक्ति के लिए नियमावली तैयार नहीं हो जाती, तब तक राज्यपाल से अनुमोदन लेकर नियुक्तियां की जा सकती हैं।
नियमावली बनने पर उसके हिसाब से ही नियुक्तियां होंगी, लेकिन नियुक्ति प्राधिकारी विधानसभा अध्यक्ष ही रहेंगे।
राज्य गठन के बाद से चौथी विधानसभा तक के प्रत्येक कार्यकाल में नियुक्तियां होती आई हैं।
अस्तित्व में है सेवा नियमावली:
विधानसभा में कार्मिकों की सेवा नियमावली वर्ष 2011 में अस्तित्व में आई।
वर्ष 2015-16 में इसमें कुछ संशोधन किए गए।
नियमावली में सीधी भर्ती और तदर्थ नियुक्ति का प्रविधान है।
इसमें कहा गया है कि पद सृजन होने पर सीधी भर्ती के पदों के लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी।
इसके अलावा तात्कालिक आवश्यकता पडऩे पर तदर्थ नियुक्तियां की जा सकेंगी।
यदि तदर्थ रूप से नियुक्त किसी कार्मिक की सेवा छह माह से अधिक समय तक निरंतर रहती है तो उसका विनियमितीकरण किया जाता है।
अब विधानसभा अध्यक्ष पर टिकी नजरें:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्पष्ट कर चुके हैं कि विधानसभा में जिस भी कालखंड में हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी की बात आ रही है, उसकी जांच के लिए वह विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध करेंगे। इसके लिए विधानसभा को जिस तरह के सहयोग की अपेक्षा रहेगी, वह दिया जाएगा।
ऐसे में अब नजरें विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण पर टिक गई हैं कि वह इस मामले में क्या निर्णय लेती हैं। विधानसभा अध्यक्ष एक दिन पहले ही कनाडा से दिल्ली लौटी हैं। एक-दो दिन में उनके देहरादून पहुंचने की संभावना है।

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