देहरादून में स्पेशल फूड मार्केट किए जा रहे विकसित, एक छत के नीचे मिलेंगे पसंदीदा व्यंजन - सच की आवाज

देहरादून में स्पेशल फूड मार्केट किए जा रहे विकसित, एक छत के नीचे मिलेंगे पसंदीदा व्यंजन

देहरादून नगर निगम ने स्ट्रीट वेंडरों के लिए खास पहल की है. जिससे स्ट्रीट वेंडर एक छत के नीचे होंगे.

देहरादून: राजधानी देहरादून में नगर निगम में अब स्ट्रीट फूड को नई पहचान देने की तैयारी है. नगर निगम शहर में थीम आधारित स्पेशल फूड बाजार विकसित करने जा रहा है,जहां हर बाजार एक खास व्यंजन के नाम से जाना जाएगा. मोमो जोन से लेकर चाट, चाइनीज, पहाड़ी, शुद्ध शाकाहारी और नॉनवेज फूड मार्केट तक जाना जाएगा.

दरअसल, राजधानी देहरादून में स्ट्रीट फूड को व्यवस्थित करने की दिशा में नगर निगम बड़ा कदम उठाने जा रहा है.शहर में अलग-अलग थीम पर आधारित फूड बाजार विकसित किए जाएंगे, ताकि सड़क किनारे लगने वाले फूड स्टॉल एक तय स्थान पर संचालित हो सकें. नगर निगम आयुक्त आलोक कुमार पांडेय के मुताबिक, सबसे पहले शहर में मोमो जोन विकसित करने की योजना है. जिसके लिए ऐसी जगह तलाश की जा रही है, जहां युवाओं की आवाजाही ज्यादा हो, इससे अतिक्रमण और ट्रैफिक की समस्या कम होगी, वहीं लोगों को एक व्यवस्थित फूड डेस्टिनेशन भी मिलेगा.

नगर निगम की योजना सिर्फ मोमो तक सीमित नहीं है.अलग-अलग थीम वाले बाजारों में कहीं सिर्फ चाट का स्वाद मिलेगा, तो कहीं चाइनीज फूड की पूरी रेंज मिलेगी. इसके अलावा पहाड़ी व्यंजनों के लिए अलग बाजार, शुद्ध शाकाहारी फूड मार्केट और नॉनवेज फूड जोन भी विकसित किए जाएंगे. साथ ही निगम सड़कों पर ठेले लगाने से होने वाली भीड़ और जाम की समस्या को कम करने के लिए शहर में एक ‘विशिष्ट मोमो मार्केट’ बनाने के लिए भी जमीन चिह्नित कर रहा है.

हालांकि देहरादून नगर निगम स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को व्यवस्थित करने, यातायात सुधारने और शहर को ‘इंदौर मॉडल’ की तर्ज पर विकसित करने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रहा है. इसके तहत रायपुर-थानो रोड पर निगम का पहला फूड कोर्ट लगभग बनकर तैयार है, जहां 31 दुकानें, ओपन डाइनिंग और पार्किंग की सुविधा होगी. यह स्ट्रीट फूड मार्किट शहर से अलग जाकर तैयार किया जा रहा है.क्योंकि शहर के अंदर स्ट्रीट फूड होने के कारण गाड़िया सड़कों पर खड़ी होती हैं, जिसके कारण सड़क पर जाम की स्थिति बनती है.

साथ ही लोगों को एक स्थान पर ही उनके पसंद का स्ट्रीट फूड भी मिल सकेगा. वहीं सड़कों पर जाम की स्थिति कम देखने को मिलेगी. नगर आयुक्त आलोक पांडे का मानना है कि इससे स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों को साफ-सुथरे वातावरण में पसंदीदा भोजन का आनंद मिलेगा.