सीएम धामी ने किया विश्व भारती विवि के परिसर का भूमि पूजन, डेढ़ अरब के कैंपस का नाम होगा गीतांजलि - सच की आवाज

सीएम धामी ने किया विश्व भारती विवि के परिसर का भूमि पूजन, डेढ़ अरब के कैंपस का नाम होगा गीतांजलि

गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की 161वीं जयंती के उपलक्ष्य में सीएम धामी ने रामगढ़ के टैगोर टाप में प्रस्तावित विश्व भारती विवि के प्रथम परिसर का भूमि पूजन किया। सीएम धामी ने कहा कि 46 एकड़ भूमि पर बनने जा रहे विवि परिसर के लिए 150 करोड़ की डीपीआर तैयार कर केन्द्र सरकार को भेजी गई है, जो स्वीकृति होने की प्रक्रिया में है। सीएम धामी ने कहा कि परिसर को गुरुदेव की रचना गीतांजली के नाम पर रखा जाएगा।

शांति निकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया ने किया आयोजन:
शांति निकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया की ओर से रविवार को गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की 161वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बतौर मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। वहीं ट्रस्ट के अध्यक्ष देवेंद्र ढेला व पूर्व विदेश सचिव शशांक ने मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी का पुष्प गुच्छ व शॉल उढ़ाकर स्वागत किया।
गुरुदेव ने यहां लिखे थे गीतांजलि के कुछ अंश:
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुदेव रविंद्र नाथ टेगौर को रामगढ़ में ही विश्वभारती विश्वविद्यालय स्थापित करने की प्रेरणा मिली थी। 1921 में उन्होंने विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की। गुरुदेव ने गीतांजलि के कुछ अंश यहीं टैगोर टॉप में स्थित अपने शीशमहल में लिखे। आज उसी भूमि पर विश्वभारती का परिसर बनने जा रहा है। जो गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार की तरफ से जो अलॉटमेंट में समस्या आ रही थी उसे दूर किया। वह सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें विश्वविद्यालय परिसर के भूमि पूजन का अवसर प्राप्त हुआ।

गुरुदेव ने जलाई राष्ट्रवाद की ज्योति:
सीएम धामी ने कहा कि टैगोर टॉप जहां गुरुदेव रहा करते थे वहां ज्ञान, योग की अद्भुत धारा प्रारंभ हुई। जिसने साहित्य, संगीत, कला, विज्ञान, नाट्य-शास्त्र, कहानी, कविता से लेकर राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रवाद की ज्योति जलाई। उन्होंने कहा कि प्राचीन गुरुकुल परंपरा ज्ञान आधारित जिस राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू किया जा रहा है, उसके महत्व को कई वर्षों पूर्व इस भूमि पर गुरुदेव ने जो रचना की उससे समझा जा सकता है।
मैकाले मॉडल से अलग विश्वकुल परंपरा

गुरुदेव ने मैकाले मॉडल से अलग एक विश्वकुल परंपरा प्रकृति के सानिध्य में शांति निकेतन के ताैर पर शुरू की। जहाँ कक्षाएं वृक्षों के नीचे खुले आकाश में होती थीं। यह श्रेष्ठतम विद्वानों की भूमि रही है। गुरुदेव ने पूरा जीवन मिट्टी की कुटिया में व्यतीत किया। इसलिए इस परिसर को भी पहाड़ी शैली के वास्तुशिल्प के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां कृषि, वानिकी, नवाचार, स्थानीय संगीत, कला, साहित्य, स्थानीय लोक विज्ञान, जैसे पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे। सीएम धामी ने इस परिसर को गुरुदेव की रचना गीतांजली नाम देने घोषणा की।
ये रहे कार्यक्रम के दौरान मौजूद

इस दौरान भीमताल विधायक रामसिंह कैड़ा, ट्रस्ट के अध्यक्ष देवेंद्र ढेला, पूर्व विदेश सचिव शशांक, केके पांडे, शुशील कुमार शर्मा, भावना मेहरा, कुंदन चिलवाल, प्रकाश आर्य, दिनेश सांगूड़ी, शिवांशु जोशी, मोहन बिष्ट, नीमा बिष्ट, प्रकाश आर्य, मीना बिष्ट, दिवान मेहरा, सुनील कुमार, चेतन टम्टा समेत कई लोग मौजूद रहे।

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