केंद्र सरकार सात दशकों से खाली पड़ी रेलवे की हजारों हेक्टेयर बेशकीमती जमीन पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, रिहायशी कॉलोनियां, कॉमर्शियल कॉप्लेक्स आदि बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। सरकार के इस फैसले से 100 साल पुरानी रेलवे की जर्जर कॉलोनियों में रहने वाले लाखों रेल कर्मचारियों को नए प्लैट मिलेंगे। वहीं, लीज की जमीन पर रियल स्टेट डेवलपर्स आम जनता को मार्केट से सस्ते फ्लैट बनाकर देंगे। इससे केंद्र के खजाने में करोड़ों रुपये आंएगे।

इस योजना पर काम कर रही रेलवे मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम रेल लैंड डेवलपमेंट आथॉरिटी (आरएलडीए) गुवहाटी, हैदराबाद सहित तीन साइट्स (स्थानों) पर रेलवे कॉलोनियों के पुनर्विकास का काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि प्रदेशों के विभिन्न शहरों में रेलवे की जमीन पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, कालोनियां, कॉमर्शियल कॉप्लेक्स बनाने के लिए सर्वे, डीपीआर बनाने आदि का काम चल रहा है।
इसमें उत्तर प्रदेश में प्रयागराज झूंसी रेलवे स्टेशन (प्रस्तावित) साइट पर सात हेक्टेयर जमीन लीज पर दी जाएगी। यहां मल्टी स्टोरी बिल्डिंग व कॉमर्शियल कॉपलेक्स बनाए जाएंगे। गोखरपुर, वारणासी, लखनऊ, मुरादाबाद, झांसी, आगरा आदि में जर्जर रेल कालोनियों के स्थान पर मल्टी स्टोरी फ्लैट-क्वार्टर बनेंगे। बरेली के इज्जतनगर में रेल भूमि लीज पर देने के साथ रेलवे स्टाफ क्वार्टर, कार्यायल, हेल्थ केयर सेंटर आदि बनाया जाएगा। बिहार के पटना में टीटीई रेस्ट हाऊस और झारखंड के टाटा नगर में 10 हेक्टयेर जमीन पर निर्माण कार्य किया जाएगा।
देशभर की 84 साइट्स पर नए साल में निर्माण कार्य शुरू होगा
आरएलडीए के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश डुडेजा ने बताया कि देशभर की 84 साइट्स पर नए साल में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसमें 600 हेक्टयेर जमीन लीज पर दी जाएंगी। 25,000 रेलवे स्टाफ के लिए क्वार्टर-फ्लैट बनाए जाएंगे। पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्य से 99 साल की लीज पर रेलवे की जमीन दी जाएगी। इसमें 100 स्थानों पर कॉमर्शियल ग्रीनफील्ड साइट्स हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियाहशी आवास की समस्या का समाधन होगा।

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