स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर धड़ल्ले से धांधलेबाजी, तथ्यों के साथ डीएम तक पहुंची शिकायत, जांच कमेटी गठित - सच की आवाज

स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर धड़ल्ले से धांधलेबाजी, तथ्यों के साथ डीएम तक पहुंची शिकायत, जांच कमेटी गठित

DM को स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर दिए जा रहे लाभों में अनियमितताओं की शिकायत मिली. शिकायत सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने की.

देहरादून: उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर धांधलेबाजी का खेल जारी है. ये सब तब है जब 1 साल पहले ही ऐसे मामलों का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री ने खुद एसआईटी जांच के आदेश दिए थे. हैरानी की बात ये है कि सरकारी सिस्टम में ही फर्जी दस्तावेजों को स्वीकृति मिल रही है और फिर अधिकारियों की नाक के नीचे ही फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थी इसका लाभ भी ले रहे हैं.

स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को मिलने वाला लाभ भी फर्जीवाड़े से अछूता नहीं रह गया है. स्थिति यह है कि अब स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी सिस्टम में मिलने वाले लाभ को भी जालसाज डकार रहे हैं. स्थिति यह है कि ऐसे हालातों का पता भी तब चल रहा है, जब स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित खुद इसका संज्ञान ले रहे हैं.

उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों पर डाका डालने का मामला तो पिछले कई सालों से चर्चाओं में भी रहा है और इसके कारण जांच के बाद कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा है. लेकिन अब ताजा मामला शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़ा करने वालों की पैठ से जुड़ा हुआ है. इसके तहत स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित होने का फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसके नाम पर आरक्षण का लाभ लेने की कोशिश की जा रही है.

हैरत की बात यह है कि यह सब तब सामने आया है जब खुद स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित ने इस पूरे प्रकरण को समझकर इसकी शिकायत की है.

प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने इस मामले में जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग तक को 3 सितंबर भी चिट्ठी लिखी है. लेटर में डोमिसाइल सर्टिफिकेट की भी जांच करवाने के लिए कहा गया है. खास बात यह है कि जांच के लिए लिखे गए इस पत्र में पांच अभ्यर्थियों के नाम समेत उनके प्रमाण पत्रों से जुड़े नंबर्स भी साझा किए गए हैं. खास बात यह है कि इस शिकायत के बाद जाकर सरकारी सिस्टम में बैठे अधिकारियों को यह पता चल पाया है कि इस तरह की कोई गड़बड़ी सरकारी सिस्टम में हो चुकी है.

ईटीवी भारत से बात करते हुए प्रदीप बहुगुणा कहते हैं कि,

इस मामले में खुद सभी दस्तावेजों को देखा है और इन दस्तावेजों में मौजूद एड्रेस समेत दूसरी चीजों पर ध्यान देने के बाद उन्हें यह पता चला है कि ऐसे करीब 5 से 6 अभ्यर्थी हैं जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित होने का फर्जी दस्तावेज बनवाया है. सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह है कि इन दस्तावेजों के नाम पर एमबीबीएस की आरक्षित सीटों का भी कुछ अभ्यर्थी लाभ लेने में कामयाब हो रहे हैं.
-प्रदीप बहुगुणा, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित-

इस मामले पर ईटीवी भारत ने देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान से भी बात की तो उन्होंने कहा कि,

इस तरह की शिकायत प्राप्त हुई है, जिसके लिए संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों के आधार पर जांच करने के लिए कहा है.
-आशीष चौहान, जिलाधिकारी देहरादून-

यह है मामला: यह पूरा मामला फिलहाल एमबीबीएस की सरकारी सीट के कोटे से जुड़ा हुआ है. इसमें स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों को 2 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाता है और इसी का लाभ उठाने के लिए कुछ लोगों ने गलत तरीके से उत्तराखंड में दस्तावेजों को बनवाने का काम किया और उसके बाद सरकारी सीट को पाने की कोशिश की है.

इस मामले में मेडिकल एजुकेशन के निदेशक आशुतोष सायना ने 8 सितंबर को देहरादून जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर मामले की गंभीरता को बताने की कोशिश की है. उन्होंने लिखा है कि,

यह मामला बेहद गंभीर है, इसलिए इस प्रकरण की जिलाधिकारी कार्यालय के स्तर पर जांच कर ली जाए ताकि गलत तरीके से दस्तावेज बनाकर यदि किसी अभ्यर्थी ने लाभ लिया है तो उसकी जानकारी मिल सके.
-आशुतोष सायना, निदेशक, मेडिकल एजुकेशन-

चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 1 साल पहले ही स्वतंत्रता सेनानी संगठन ने मेडिकल की सीटों में फर्जीवाड़ा होने और अवैध तरीके से कुछ लोगों द्वारा इन सीटों में आरक्षण का लाभ लिए जाने की शिकायत की थी. इसके बाद इस मामले की जांच के मुख्यमंत्री ने भी आदेश दिए थे. उस दौरान ऐसे मामलों की एसआईटी जांच के आदेश हुए थे. बड़ी बात यह है कि 1 साल बाद फिर इसी तरह का मामला सामने आया है और अब इस पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश देते हुए कमेटी का भी गठन कर दिया है.